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विक्रम लैंडर से टूटा संपर्क, फिर भी होगा चाँद पर शोध

चंद्रयान – 2 मिशन के लिए पूरा देश उत्सुक था। जैसे – जैसे विक्रम लैंडर की चाँद पर लैंडिंग का वक्त पास आता गया वैज्ञानिकों के साथ – साथ पूरे देश की धड़कने तेज थी। पर लैंडिंग से केवल 2.1 किमी ऊपर विक्रम लैंडर का संपर्क वैज्ञानिकों से टूट गया परंतु इसके बावजूद भी विक्रम लैंडर को जिस काम के लिए चाँद पर भेजा गया है वह जरूर पूरा होगा।

ऑर्बिटर करेगा अपना काम – चंद्रयान – 2 ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम है। यह 3.2*5 8*2.1 मीटर बड़ा है। चंद्रयान – 2 की मिशन लाइफ एक साल की है। पूरे मिशन मे इस ऑर्बिटर की बहुत अहम भूमिका है । इस ऑर्बिटर के ही जरिए विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर और धरती पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों के बीच संपर्क होना है। यह चाँद की कक्षा पर मौजूद रहेगा और विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर से मिली जानकारी को इसरो के वैज्ञानिकों तक पहुंचाएगा। चंद्रयान – 2 मिशन 95% काम कर रहा है इसका मतलब यह है कि ऑर्बिटर के सभी उपकरण सुचारू रूप से काम कर रहे हैं।

चंद्रयान – 2 ऑर्बिटर के पास चाँद पर शोध करने के लिए आठ उपकरण हैं। चाँद का डिजिटल मॉडल तैयार करने के लिए ऑर्बिटर के पास टेरेन मैपिंग कैमरा -2 हैं।

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