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ISRO द्वारा बड़ा ऐलान, गगनयान मिशन के लिए भारत के इन अंतरिक्ष यात्रियों को मिलेगा मौका

साल 2020 के शुरुआत में ही इसरो के प्रमुख के सिवन ने एक बड़ा ऐलान किया हैं। गगनयान मिशन के लिए चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को मौका मिलेगा। इस मिशन के लिए भारतीय वायु सेना के 4 पायलट जाएंगे। इन चयनित अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण जनवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू हो जाएगा। इसी वजह से इसरो ने फरवरी तक रूस में चार वायु सेना के पायलटों को अंतरिक्ष यात्रियों के रूप में प्रशिक्षित करने के लिए रूस भेजने की तैयारी कर चुका है।

इसरो का एक और बेहतरीन प्रयास

देश की अंतरिक्ष एजेंसी 2022 में अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान के लिए प्रयास करने वाली है और इसी के साथ ही अगले साल चंद्रमा पर एक रोवर को उतारने के दूसरे प्रयास की योजना भी बना रही है। भारत का अगला चंद्र अभियान, चंद्रयान -3, को मंजूरी मिल गई हैं और इसी के चलते इस मिशन का लॉन्च अगले साल हो सकता है। चंद्रयान-3 और मिशन गगनयान, दोनों का काम एक साथ चल रहा है। गगनयान मानव को अंतरिक्ष में ले जाने का भारत का पहला अभियान है।

चंद्रयान-3 मिशन के लिए होगा इतने करोड़ का खर्च

चंद्रयान-3 मिशन पर 250 करोड़ रुपये का खर्च होगा। चंद्रयान-3 मिशन में पहले की तरह लैंडर, रोवर और एक ‘प्रोपल्शन मॉड्यूल’ होगा। चूंकि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल 7 साल हैं इसलिए तीसरे चंद्र मिशन के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। साल 2019 में इसरो की रणनीति विस्तार कार्यक्रमों की थी। इसरो ने नए स्पेसपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है और यह पोर्ट तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के थुटुकुडी में बनाया जाएगा। श्रीहरिकोटा के अलावा यह ऐसा दूसरा केंद्र होगा। इसी के साथ ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी के निर्माण का काम निजी हाथों में सौंपे जाने की योजना है।
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