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वैकुंठ चतुर्दशी के दिन पूजन करने से मिलता हैं सालभर के पाप से मुक्ति

एक साल में दो ऐसे तिथि आते हैं जो सभी पापों को नष्ट करने वाला होता हैं। बस शर्त हैं की पवित्र मन से भक्ति की जाए, वह दो तिथि हैं कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी। हालांकि पूरा कार्तिक महीना ही बहुत फलदायक होता हैं परंतु फिर भी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहते हैं और इस दिन किए गए पूजा-पाठ से कभी भी नरक ( यमलोक ) का मुख नही देखना पड़ता। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं और फिर भगवान शिव की आराधना भी करनी चाहिए। इससे सभी पाप नष्ट हो जाता हैं और स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती हैं। वैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु ने अपने आराध्य देव भगवान शिव की पूजा की थी और श्री हरि की पूजा से प्रसन्न होकर देवों के देव महादेव ने उन्हे आशीर्वाद दिया था।

भगवान शिव और श्री हरी की करें पूजा :

महादेव ने भगवान विष्णु से कहा जो कोई भी वैकुंठ चतुर्दशी के दिन सच्ची श्रद्धा और भक्ति भाव से आपकी फिर मेरी पूजा करेगा उसके सारे पाप नष्ट हो जाएंगे। उस दिन श्री हरि एक हजार कमल पुष्प से महादेव की पूजा करने वाले थे परंतु भगवान शिव ने अपने परम भक्त की परीक्षा लेने के लिए एक कमल पुष्प वहां से गायब कर दिया। जैसे ही भगवान विष्णु अपनी पूजा प्रारंभ करने वाले थे, तब उन्होंने देखा एक कमल पुष्प कम हैं इसलिए उन्होंने सोचा “मेरी आँखें भी तो कमल के समान हैं इसलिए मैं अपनी एक आँख अर्पित कर देता हूं, इससे एक हजार कमल पुष्प चढ़ाने का मेरा संकल्प पूर्ण हो जाएगा।” जैसे ही श्री हरी ऐसा करने वाले थे उसी वक्त साक्षात भगवान शिव वहां प्रकट हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को आशीर्वाद दिया और उनकी पूजा स्वीकार किया।

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