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जानिए ऐसे पात्रों के बारे में जो रामायण और महाभारत दोनों काल में थे मौजूद

मित्रों शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि त्रेता युग और द्वापर युग में 2000 वर्षों का अंतर है। किंतु त्रेता युग के रामायण काल के कई पात्र महाभारत काल तक जीवित थे। तो आइये मित्रों जाने उन पात्रों के बारे में।

जामवन्त

श्रीराम की सहायता करने वाले जामवंत के बारे में शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि उनकी उम्र परशुराम और हनुमान से भी अधिक है। इनका जन्म उस समय हुआ था जब त्रेता युग राजा बालि का काल चल रहा था। इसके साथ ही उनका द्वापर युग में श्री कृष्ण से भेंट का वर्णन भी मिलता है। जामवंत की माता एक गंधर्व कन्या थी इसीलिए उन्हें अग्निपुत्र भी कहा जाता है।

हनुमान जी

मित्रों जैसा कि हम सभी जानते है कि सर्वशक्तिमान और भक्तों के कष्ट हरने वाले बजरंगबली आज भी इस धरती पर मौजूद है। बजरंगबली त्रेता युग में भगवान श्री राम के साथ थे और द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के साथ भी। महाभारत के युद्ध में बजरंगबली के कारण ही पांडवों को विजय प्राप्त हुई थी।

मयासुर

मित्रों मयासुर लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता अर्थात रावण के ससुर थे। जिस प्रकार से देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा भगवान थे उसी प्रकार से असुरों के शिल्पी मयासुर थे। जिन्होंने कई विशाल भवनों और शास्त्रों का निर्माण करवाया था। मयासुर का उल्लेख रामायण के उत्तरकांड (सतयुग) में भी मिलता है। द्वापर युग में महाभारत के समय इन्होंने युधिष्ठिर के लिए सभा भवन का निर्माण कराया था जिसे देख कर दुर्योधन पांडवों से और अधिक क्रोध करने लगा था।

परशुराम

भगवान विष्णु के अवतार परशुराम के माता पिता जमदग्नि, रेणुका थे। रामायण काल में परशुराम का उल्लेख तब मिलता है जब भगवान श्रीराम सीता स्वयंवर के मौके पर शिव का धनुष तोड़ देंते है। और इनका उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है जब वे भीष्म पितामाह के गुरु बने थे। इन्होंने कर्ण को ब्रह्मास्त्र की शिक्षा भी दी थी।

महर्षि दुर्वासा

मित्रों दुर्वासा ऋषि को उनके क्रोध के लिए जाना जाता था। दुर्वासा राजा दशरथ के भविष्यवक्ता थे। इसके साथ ही द्वापर युद्ध में दुर्वासा महाभारत में द्रोपदी की परीक्षा लेने के लिए अपने 10 हजार शिष्यों के साथ उनकी कुटिया पहुंचे थे।

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