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जानिये कैसे शुरू हुआ गोपाष्टमी का पर्व और क्यों करते हैं इस दिन गायों की पूजा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी मनाया जाता हैं। इस दिन गायों की पूजा की जाती हैं और उन्हे चारा खिलाया जाता हैं। गोपाष्टमी के दिन गौ माता की सेवा करने से बहुत पुण्य मिलता हैं हालांकि केवल एक दिन ही नही सारी उम्र गौ सेवा करनी चाहिए क्योंकि गायों में सभी देवी-देवता विराजमान हैं। गोपाष्टमी के दिन विशेष रूप से गौ माता की सेवा की जाती हैं क्योंकि इसके पीछे एक बहुत ही पावन पौराणिक कथा छुपी हुई हैं। यह बात तो सभी को पता ही होगा भगवान विष्णु के रूप, द्वापरयुग में द्वारका में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण को गायों और बछड़ों से बेहद लगाव था। उनका सारा बचपन गायों के साथ गुजरा हैं इसलिए श्रीकृष्ण को गायों से बहुत लगाव हैं। एक बार की बात हैं जब बाल गोपाल छोटे थे और वह बछड़ों को चराने ले जाया करते थे। तब एक दिन उनके मन मे यह बात आई की अब से वे भी बाकी सब की तरह गायों की चराने ले जाया करेंगे।

भगवान विष्णु के कृष्ण अवतार को गायों से हैं बहुत लगाव :

यह बात मन में आते ही कृष्ण-कन्हैया, सीधे यशोदा माता के पास पहुंचे और कहने लगे की उन्हे भी अब से गौ माता को चराने ले जाना हैं। इस पर माता ने कहा एक बार नंद बाबा को आ जाने दो फिर तुम गाय को चराने ले जाना। नंद बाबा के आते ही कृष्ण ने उन्हे सारी बात बताई। सभी माता-पिता बच्चों की जिद्द के कारण परेशान हो जाते हैं परंतु अगर जिद्द सही हो तो उसे पूरा भी किया जाता हैं। ठीक उसी प्रकार से नंद बाबा ने भी कृष्ण के जिद्द को स्वीकार कर लिया और पंडित को बुला कर गाय चराने का सबसे अच्छा मुहूर्त निकालने को कहा। पंडित ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को सबसे अच्छा मुहूर्त बताया और तब से इस दिन को गोपाष्टमी के नाम से पूजा जाने लगा।

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