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सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 19 की इंटरनेट को कहा मौलिक अधिकार

* क्या हैं अनुच्छेद 19?

भारतीय संविधान के अनुसार अनुच्छेद 19 को नागरिकों के लिए कुछ चीजों की स्वतंत्रता देते हुए उसे मूलभूत अधिकार मन गया हैं। इस अधिकार के अंतर्गत सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, संगठन बनाना, भारत के किसी भी हिस्से में रहने और घूमना, कोई भी व्यवसाय और पेशा अपनाना, ऐसे कई अधिकार दिए गए हैं।

अनुच्छेद 19(2) में कहा गया है कि, देश की सुरक्षा और अखंडता को नुकसान नहीं होना चाहिए। भारतीय संविधान के अनुसार इंटरनेट को भी अब अनुच्छेद 19(1) ए के तहत मौलिक अधिकार मन गया हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को जम्मू- कश्मीर इस राज्य में अस्पताल, शैक्षणिक संस्थानों जैसी सभी जरूरी जगहों पर इंटरनेट सेवा बहाल करके उसे मौलिक अधिकार माना गया हैं।

एक देश ने करीब तीन साल पहले ही इंटरनेट को मौलिक अधिकार घोषित कर दिया गया हैं। उस राज्य का नाम हैं सबसे शिक्षित राज्य केरल। केरल राज्य ने अपने 20 लाख गरीब परिवारों तक इंटरनेट की सुविधा प्रदान करने की योजना बनाई थी। मार्च 2017 में केरल ने हर नागरिक के लिए भोजन, पानी, शिक्षा के साथ-साथ इंटरनेट को भी मौलिक अधिकार की घोषणा कर दी गई।

भारत देश के पहले कोस्टा रिका, एस्टोनिया, फ़िनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, स्पेन इन देशों ने पहले ही इंटरनेट को मूलभूत अधिकार माना गया हैं। अनुच्छेद 19(1) के कई हिस्से हैं जैसे कि, अनुच्छेद 19(1) (a), अनुच्छेद 19 (1)(b), अनुच्छेद 19(1) (c), अनुच्छेद (1) (d), अनुच्छेद (1) (e), अनुच्छेद 19 (1) (f) जिसे हटाया जा चुका हैं जो पहले संपत्ति के अधिकार प्रधान किया गया था और अनुच्छेद 19 (1) (g) इन्हें मौलिक अधिकार माना गया हैं।

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