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माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से होता हैं हजारों पापों का नाश

माघ मास की पूर्णिमा को गंगा स्नान करने से हजारों पापों से मुक्ति मिलती हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। पूर्णिमा का दिन चन्द्रमा को सबसे प्रिय दिन होता है, इस दिन पूर्ण चंद्रमा आसमान में दिखाई देता है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का दिन होता है। कहा जाता है की इस दिन नदी में स्नान कर दान करने से कई गुना फल मिलता है। इस दिन पूजा-पाठ करना और ब्रह्मण को भोजन भी कराया जाता है। बैशाख, कार्तिक और माघ की पूर्णिमा को तीर्थ स्नान और दान पुण्य दोनों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करना भी शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगा में स्नान करने आते हैं, इसलिए इस पूर्णिमा का अधिक महत्व माना जाता है।

माघ पूर्णिमा का महत्व

नर्मदा नदी के तट पर शुभव्रत नामक विद्वान ब्राह्मण रहते थे, लेकिन वे काफी लालची थे। इनका लक्ष्य किसी भी तरह धन कमाना था और ऐसा करते-करते ये समय से पूर्व ही वृद्ध दिखने लगे और कई बीमारियों की चपेट में आ गए। इस बीच उन्हें अंर्तज्ञान हुआ कि उन्होंने पूरा जीवन तो धन कमाने में बीता दिया, अब जीवन का उद्धार कैसे होगा। इसी क्रम में उन्हें माघ माह में स्नान का महत्व बताने वाला एक श्लोक याद अाया। इसके बाद स्नान का संकल्प लेकर ब्राह्मण नर्मदा नदी में स्थान करने लगे। करीब 9 दिनों तक स्नान के बाद उऩकी तबियत ज्यादा खराब हो गई और मृत्यु का समय आ गया। वे सोच रहे थे कि जीवन में कोई सत्कार्य न करने के कारण उन्हें नरक का दुख भोगना होगा, लेकिन माघ मास में स्नान के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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