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जानिये माँ सरस्वती के जन्म से जुड़ी यह खास बात , बहुत कम लोगों को होगी जानकारी

माँ सरस्वती को विद्या और कला की देवी माना जाता हैं। पुराणों में माँ सरस्वती का वर्णन बहुत सादगी और संपन्नता के साथ किया जाता हैं। माता सरस्वती के हाथों में वीणा सुशोभित हैं। आज हम आपको बताएंगे आखिर माता सरस्वती का जन्म कैसे हुआ ?

माँ सरस्वती का जन्म

पुराणों में बताया गया है कि जगत रचियता ब्रह्माजी एक बार भ्रमण पर निकले तो उन्‍हें सारा ब्रह्मांड मूक नजर आया। चारों ओर अजीब सी खामोशी थी। यह देखकर उन्‍हें सृष्टि की रचना में कुछ कमी सी महसूस हुई। भ्रमण करते हुए ब्रह्माजी एक जगह ठहरे और अपने कमंडल से थोड़ा सा जल लेकर छिड़का तो एक महान ज्‍योतिपुंज में से एक देवी प्रकट हुईं। वीणा लिए यह देवी थीं मां सरस्‍वती। चेहरे पर अद्भुत तेज लिए मां सरस्‍वती ने ब्रह्माजी को प्रणाम किया। इस प्रकार वह ब्रह्माजी की पुत्री कहलाईं। उनके प्राकट्य के उत्‍सव के तौर पर बसंत पंचमी का उत्‍सव मनाया जाता है।

ब्रम्हा जी का आदेश और माता सरस्वती का आशीर्वाद

मां सरस्‍वती के प्रकट होने पर ब्रह्माजी ने उनसे कहा कि इस सृष्टि में सभी जीव मूक हैं। ये केवल चल रहे हैं, इनमें आपसी संवाद करने की सामर्थ्‍य नहीं हैं। इस पर देवी सरस्‍वती ने उनसे पूछा, प्रभु मेरे लिए क्‍या आज्ञा है? ब्रह्माजी ने कहा, देवी आपको अपनी वीणा के सुरों से इस संसार को ध्‍वनि प्रदान करनी है, ताकि ये सभी आपस में संवाद कर सकें। एक-दूसरे के दुख-तकलीफ को समझ सकें। स्‍नेह दे सकें। उनकी आज्ञा का पालन करके मां सरस्‍वती के समस्‍त जीवों को आवाज प्रदान की। ऐसे ही फिर माँ सरस्वती के आशीर्वाद से मनुष्यों को कला और विद्या का वरदान प्राप्त हुआ।

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