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जानिये क्यों मनाते हैं छठ का त्योहार और कैसे शुरू हुआ यह पर्व

छठ एक बहुत ही पावन परंतु कठिन व्रत हैं, यह पर्व सुर्य षष्ठी व्रत होने के कारण छठ के नाम से जाना जाता हैं। छठ साल में दो बार मनाया जाता हैं, पहला चैत्र महीने में और दूसरा कार्तिक महीने में। यह चार दिन का त्योहार हैं और इस पर्व में बहुत कठिन व्रत होता हैं। इसमें सूर्य को अर्घ्य दिया जाता हैं घंटो पानी में खड़े रह कर, इसके बाद जाकर यह व्रत संपन्न होता हैं। छठ करने से घर में सुख-शांति , समृद्धि और परिवार में बरकत बनी रहती हैं, इस पर्व को करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं।

छठ होता हैं एक बेहद कठिन व्रत :

यह पर्व प्राचीन काल से चला आ रहा हैं त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी इस व्रत को किया था इसके बाद द्वापरयुग में पांडवों की पत्नी द्रौपदी, सूर्य पुत्र करण ने भी छठ का व्रत किया था। इस पर्व में सुर्य देव को बाँस, पीतल या सोने के बने सूप में अनेकों फल और मिठाई रख कर अर्घ्य दिया जाता हैं। जो लोग इस व्रत को करते हैं उनका आशीर्वाद लेना बहुत फलदायक होता हैं। छठ का पर्व ज्यादातर बिहार, झारखंड के श्रेत्र में प्रचलित हैं, हालांकि आज हर शहर में हर तरह के लोग हैं इसलिए अन्य जगहों पर भी यह त्योहार देखने को मिल सकता हैं।

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