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जानिये क्यों भगवान श्रीकृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत अपनी एक उंगली पर

एक बार गोकुल में इंद्रदेव की पूजा के लिए तैयारी हो रही थी तब श्रीकृष्ण ने पूछा की ये सब क्या हो रहा हैं और क्यों? तब उन्हे बताया गया की वे सब देवताओं के राजा इंद्रदेव के पूजा की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि वे हर वर्ष वर्षा कराते हैं और इससे हम सबको अन्न और जल मिलता हैं इसलिए हम सब हर वर्ष उनकी पूजा करते हैं ताकि हमारे उपर उनकी कृपा बनी रहे। श्रीकृष्ण को यह बात बिल्कुल उचित नही लगी और उन्होंने सबसे कहा की इस हिसाब से तो हमें गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए वे सदैव हमारी रक्षा करते हैं और इतना ही नही उनके इस विशाल पर्वत पर हमारी गायों को चारा मिलता हैं और वे हमेशा अपना भोजन वही से करती हैं। गायों से हमें दूध, दही, मक्खन मिलता हैं, इंद्रदेव तो वर्षा के देवता हैं उनका कर्तव्य हैं वर्षा करना पर गोवर्धन तो निस्वार्थ भाव से हमारी सेवा में लगे हैं इसलिए हमें उनकी पूजा करनी चाहिए।

गोकल वासियों पर इंद्रदेव का प्रकोप :

कृष्ण की बातें सभी गोकुल वासियों को उचित लगी और तब उनलोगों ने निर्णय लिया की अब से वे गोवर्धन की पूजा करेंगे, इस निर्णय से इंद्रदेव बहुत क्रोधित हुए और उन्हे ये अपना अपमान लगा। तब उन्होंने गोकुल वासियों को सबक सिखाने के लिए मूसलाधार वर्षा करना आरंभ कर दिया, दिन-प्रतिदिन वर्षा का प्रकोप बढ़ता गया और स्थिति यह हो गई की मानो अब बाढ़ आने वाला हो तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा कर एक हफ़्ते तक , जब तक वर्षा ना रूका तब तक सभी गोकुल वासियों की रक्षा की। जब इंद्रदेव को अपनी भूल का अंदाजा हुआ तब तुरंत उन्होंने वर्षा रोक दिया और भगवान के पांव पकड़ कर उनसे माफी मांगा।

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