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जानिये क्यों दिवाली से पहले मनाते हैं धनतेरस

दिवाली से दो दिन पूर्व धनतेरस मनाया जाता हैं। धनतेरस के दिन धन्वंतरि की पूजा की जाती हैं और दीपदान किया जाता हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पड़ अकाल मृत्यु नही होता । धनतेरस से जुड़ी एक पौराणिक कथा कुछ इस प्रकार हैं – एक बार यमराज ने अपने दूतों से प्रश्न किया , क्या कभी किसी प्राणी के प्राण हरते वक्त तुम लोगों को दया नही आती? यमराज का प्रश्न सुनकर यमदूत ने कहा नही महाराज हमें दया नही आती।

महाराज हंस और महाराज हेमा की मुलाकात :

यह उत्तर यमराज को सही प्रतित नही हुआ और उन्होंने यही प्रश्न दोबारा पुछा और कहा भयभीत होने की आवश्यकता नही हैं मुझे सच-सच बताओं। तब यमदूतों ने कहा महाराज एक बार हमें एक व्यक्ति के प्राण हरते वक्त बहुत दुख हुआ, तब यम ने उस व्यक्ति के विषय में उत्सुकता से पूछा। यमदूतों ने बताया एक राजा थे जिनका नाम हंस था वह एक बार शिकार करते-करते सीमा पार दूसरे साम्राज्य में पहुंच गए। वहां के राजा, राजा हेमा ने उनका बहुत आदर-सतकार किया, उसी वक्त राजा हेमा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया। चारो ओर खुशी की लहर थी उसी बीच ज्योतिषाचार्य ने महाराज के नवजात शिशु के नक्षत्रों को गणना कर बताया की इस बालक के विवाह के चार दिन बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी।

यमराज द्वारा यमदूत को बताया गया धनतेरस का महत्व :

इस बात को सुनकर सभी बहुत परेशान हो गए और बालक को मृत्यु से बचाने के लिए यमुना तट पर एक गुफा में ब्रह्मचारी के वेश में छुपा दिया गया। एक बार राजा हंस की पुत्री यमुना तट पर गई और वहां उनकी भेट राजा हेमा के पुत्र से हुई। उन दोनों ने विवाह कर लिया और विवाह के चार दिन बाद ही उस युवक की मृत्यु हो गई। यमदूत ने कहा महाराज जब हम वहां पहुंचे तो उस कन्या का विलाप देख हमे उस पर बहुत दया आई और उसके लिए बहुत दुख हुआ। हे! महाराज क्या कोई ऐसा उपाय नही हैं जिससे अकाल मृत्यु से बचा जा सके , तब यमराज ने बताया धनतेरस के दिन धन्वंतरि की पूजन करने से अकाल मृत्यु नही होती हैं।

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