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जानिये क्यों खास होता है माघ पूर्णिमा का दिन, गंगा स्नान और दान से मिलता है पुण्य

माघ पूर्णिमा के महत्त्व का उल्लेख पौराणिक ग्रन्थों में मिलता है। पुराणों की कथा के अनुसार इस खास दिन देवता अपना रूप बदलकर गंगा स्नान के लिए प्रयागराज आते हैं। जो श्रद्धालु प्रयागराज में एक महीने तक कल्पवास करते हैं उसका समापन माघ पूर्णिमा के दिन ही होता है। कल्पवास करने वाले सभी श्रद्धालु माघ पूर्णिमा पर मां गंगा की पूजा-अर्चना कर साधू, संतों और ब्राह्मणों को आदर से भोजन कराते हैं। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से शरीर के रोग नष्ट होते हैं। प्रयागराज में एक महीने तक चलने वाला कल्पवास का समापन भी माघ पूर्णिमा के दिन ही होता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक माघ पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगाजल में वास करते हैं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व है।

इस साल माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 8 फरवरी की शाम 6.05 बजे से शुरू होकर 9 फरवरी के 1.05 बजे तक रहेगा। इस बार पूर्णिमा पांच महापुरुष योग में एक यश योग और चंद्राधि योग में मनाई जाएगी। इस मौके पर देश के तमाम तालाबों और नदियों को लोग आस्था की डुबकी लगाएंगे। अगले सुबह तारों की मौजूदगी में नदी व सरोवरों में स्नान करना ज्यादा शुभ माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार भक्त अगर माघ पूर्णिमा स्नान के बाद ध्यान और जप-तप से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तो मुक्ति और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। इस दिन दानपुण्य का बड़ा महत्व माना जाता है। गोदान, तिल, गुड़ व कंबल का विशेष महत्व है। बेहतर होगा कि आप गरीबों और ब्राह्मणों को दान दें और भोजन कराएं। आप वस्त्र, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न आदि चीजों का दान कर सकते हैं।

बहुत पुण्यदायक होता है माघ पूर्णिमा

माघ मास में देवता पृथ्वी पर निवास करते हैं। माघ पूर्णिमा पर शीतल जल गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति पापमुक्त होकर स्वर्ग लोक को प्राप्ति होती है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। गंगाजल का स्पर्शमात्र भी स्वर्ग की प्राप्ति करा सकता है। पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा करने से सौभाग्य प्राप्त होता है।

माना जाता है कि इस दिन से ही कलयुग की भी शुरुआत हुई थी। महीनेभर से चल रहा कल्पवास भी इसी दिन संपन्न होता है। पूरे माघ में श्रद्धालु नदी के तट पर कल्पवास व तप करते हैं। ब्रह्म वैवर्त्य पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के मुहूर्त में स्नान करने से ब्रह्मलोक और बैकुंठ की प्राप्ति होती है। इस दिन महाकुंभ में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन चंद्रमा भी अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं। पूर्ण चंद्रमा अमृत वर्षा करते हैं, जिसका अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों पर पड़ता है।

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