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क्यों करते हैं गोवर्धन पूजा, जानिये इसकी पौराणिक कथा

दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा किया जाता हैं। गोवर्धन पूजा द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा शुरू किया गया था और तब से लोग हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकम तिथि को यह त्यौहार मनाते हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी क्योंकि उनका मानना था की गोकुल वासियों और उनकी गायों को गोवर्धन पर्वत द्वारा अन्न और भोजन मिलता हैं और इंद्रदेव द्वारा जब गोकुल में वर्षा का प्रकोप बढ़ने लगा तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कानी उंगली पर एक हफ्ते तक गोवर्धन पर्वत को उठाए रखा और सभी गोकुल निवासी उस पर्वत के क्षत्र छाया में पनाह लेकर वही सुरक्षित वर्षा बंद होने तक रहे।

दिवाली के अगले दिन करते हैं गोवर्धन पूजा :

इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत की और गायों की पूजा करते हैं , गोबर से पहाड़ का आकार बना कर उसकी पूजा करते हैं, उसके आस-पास दीपक जलाया जाता हैं और पुष्पों से उस टीले को सजाया जाता हैं, इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर अंत में लोग इसके चारो ओर परिक्रमा करते हैं जिससे माना जाता हैं की स्वयं गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की गई हो। गोवर्धन पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण अति प्रसन्न होते हैं।

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