Dharmik Aur Adhyatmik

क्या आप जानते हैं भगवान शिव के उस धनुष का नाम जिसे श्रीराम ने तोड़ डाला

रामायण में वर्णित हैं भगवान श्रीराम का विवाह माता सीता से एक स्वयंवर के जरिए हुआ था। जनकपुरी के राजा, राजा जनक ने अपनी पुत्री जानकी के विवाह के लिए एक प्रतिज्ञा किया था। उस प्रतिज्ञा के अनुसार जो कोई वीर भगवान शिव के धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा उसका विवाह जानकी जी से होगा।भगवान शिव के उस धनुष का नाम “पिनाक” था। भगवान शिव के उस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास सभा में मौजूद सभी राजा और राजकुमारों ने किया। जब सभी ने प्रयत्न करके हार मान लिया तब गुरू विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने राजा जनक के प्रण को पूरा करने का निश्चय किया। भगवान श्रीराम ने जैसे ही धनुष को उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाया वह धनुष भगवान के स्पर्श मात्र से ही टूट गया।

मोक्ष प्राप्ति के लिए भगवान श्रीराम के हाथों मरना चाहता था रावण

रावण एक क्रूर और सबसे विकराल राक्षस था, जिससे सभी लोग घृणा करते थे। जब रावण के भाइ विभीषण ने सीता के अपहरण की वजह से राम के हमले के बारे में सुना तो अपने भाई को आत्मसमर्पण करने की सलाह दी थी। यह सुनकर रावण ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और राम के हाथों मरकर मोक्ष पाने की इच्छा प्रकट की। उसने कहा कि “अगर राम और लक्ष्मण दो सामान्य इंसान हैं, तो सीता मेरे पास ही रहेगी क्योंकि मैं आसानी से उन दोनों को परास्त कर दूंगा और यदि वे देवता हैं तो मैं उन दोनों के हाथों मरकर मोक्ष प्राप्त करूँगा। रावण के मन में भगवान शिव के प्रति दृढ़ आस्था थी। पुराणों में इस बात की भी जानकारी मिलती है कि रावण एक बहुत बड़ा विद्वान था और उसने वेदों का अध्ययन किया था।

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