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आयरन लेडी ने 13 दिन में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बनाया था नया देश

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र देश हो गया था। लेकिन, उसके बाद भी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध खत्म नहीं हो पाया। साल 1966 से 1977 के दौरान भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी। साल 1971 में पाकिस्तान आर्मी के जुल्म बढ़ने पर बांग्लादेश के लोगों को अलग बांग्लादेश राष्ट्र की मांग बढ़ती ही जा रहीं थी। अमेरिका के नेशनल सिकियोरिटी एडवाइजर हेनरी किसिंजर पाकिस्तान के साथ ही थे।

इंदिरा गांधी की किसिंजर से मुलाकात होने पर इंदिरा ने पाकिस्तानी आर्मी के द्वारा बांग्लादेश के लोगों पर होने वाले जुल्म का जिक्र किया। परंतु, अमेरिका पाकिस्तान के साथ थी इसलिए उन्होंने इंदिरा के आरोपों को नजरअंदाज कर दिया। उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध की शुरुआत हो गई। इस युद्ध में पाकिस्तान की मदद के लिए अमेरिका ने भारत पर अमेरिकी जहाजी बेड़ा भेजकर भारत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।

कैसे हुआ बांग्लादेश के जन्म?

इस युद्ध की शुरुआत 3 दिसंबर 1971 को हो गई थी। सबसे पहले पाकिस्तानी एयरफोर्स ने भारत पर हमलों की शुरुआत की, उसके बाद भारत ने भी उसका जवाब पलटवार के स्वरूप में दिया। इस युद्ध के दौरान इंडियन आर्मी-नेवी और एयरफोर्स ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। पाकिस्तान आर्मी के 93000 सैनिकों ने ढाका में सरेंडर कर दिया। इस युद्ध का अंत 16 दिसंबर 1971 को हुआ। 13 दिन चल रहे युद्ध के दौरान 16 दिसंबर को पाकिस्तान भारत देश के घुटनों पर था। उसके बाद पाकिस्तान देश दो टुकड़ों में बट गया। उस दूसरे टुकड़े का नाम था बांग्लादेश। इस तरह एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ था।

इस युद्ध के सफलता का श्रेय इंदिरा गांधी को ही जाता हैं क्योंकि अमेरिका पाकिस्तान के साथ होने की वजह से इंदिरा के लिए उस वक्त परीक्षा की घड़ी थी। अमेरिका के साथ चीन के भारी दबाव से भी इंदिरा गांधी नहीं डरी बल्कि अच्छे साहस के साथ इस आयरन लेडी ने पाकिस्तान को पलटके जवाब देकर पकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए।

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