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इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने के लिए अब उत्तर प्रदेश में बदले गए नियम

उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेज में अब जेईई ( ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम ) के तहत दाखिला लिया जाएगा। नई व्यवस्था को वर्ष 2021 से लागू करने की तैयारी है। राज्य सरकार इन संस्थानों में विश्वविद्यालय स्तर से होने वाली परीक्षा के जरिये दाखिले की व्यवस्था खत्म करने जा रही है। इससे प्रदेश के छात्रों को इंजीनियरिंग संस्थानों में अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी से मुक्ति मिलेगी। उत्तर प्रदेश में अभी राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा का आयोजन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) करता है। इसी परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रदेश के सभी तकनीकी विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है। हालांकि कुछ निजी विश्वविद्यालय अलग से प्रवेश परीक्षा का आयोजन करते हैं।

जेईई के तहत होगा राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला

उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को जिस विश्वविद्यालय या संस्थान में दाखिला लेना होता है, उसी के मुताबिक तैयारी करनी होती है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों को बिल्कुल अलग तैयारी करनी पड़ती है। इसमें विद्यार्थियों को काफी कठिनाई होती है और अभिभावकों को भी बच्चों की तैयारी के लिए दोहरा आर्थिक खर्च उठाना पड़ता है। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित का हवाला देते हुए दाखिले के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है। देश के तमाम बड़े प्रौद्यागिकी संस्थानों जैसे, आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, जीएफटीआई आदि में दाखिले जेईई के माध्यम से होता है। जेईई कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के पास है। अगर प्रदेश के संस्थानों में भी जेईई के जरिये दाखिले होंगे तो विद्यार्थियों को राज्य स्तरीय संस्थानों में दाखिले के लिए अलग से तैयारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं, प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में दाखिले के अवसर भी बढ़ेंगे, क्योंकि उन्हें दो अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारियों में अपना वक्त नहीं बर्बाद करना पड़ेगा।
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