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आखिर क्यों भगवान शिव की पूजा में शंख का प्रयोग है वर्जित, जानिये इसके पीछे की वजह

शिवपुराण एक ऐसा पुराण है जिसमे भगवान शिव से संबंधित सभी विषय और रहस्यों की जानकारी मिलती हैं। भगवान शिव की पूजा में हम कभी भी शंख का प्रयोग नही करते, अब इसके पीछे क्या वजह हैं यह हम आपको इस लेख में बताने जा रहे है। शंख का निर्माण शंखचूड़ नामक दैत्य की हड्डियों से हुआ है। एक बार पृथ्वी पर दंभ नामक दैत्य का शासन हुआ करता था। दैत्य दंभ की कोई संतान नहीं थी संतान प्राप्ति के लिए उसने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की भगवान विष्णु ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया। दंभ का पुत्र शंखचूड़ भी बहुत बड़ा दैत्य बना और उसने बाकी सभी पृथ्वी वासी और देवताओं का जीना मुश्किल कर दिया।

भगवान शिव को शंख से नही करते हैं जल अर्पण

सभी देवताओं ने उस दैत्य से तंग होकर भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे उनकी जान बचाए किंतु भगवान विष्णु ने ही दंभ को वरदान दिया था पुत्र रत्न का इसलिए वे देवताओं की मदद करने में असमर्थ थे तथापि भगवान विष्णु ने भगवान शिव से सभी की मदद करने का अनुरोध किया। भगवान शिव ने दैत्य शंखचूड़ की शक्तियों का विनाश करके उसे पराजित किया। उसे हराने के बाद भगवान ने उसका वध कर दिया और उसी दैत्य शंखचूड़ की हड्डियों से शंख का निर्माण हुआ क्योंकि भगवान शिव ने उस दैत्य का वध किया था इसलिए भगवान शिव को कभी भी शंख से जल अर्पण नहीं किया जाता और क्योंकि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी उस दैत्य के आराध्य और पूजनीय देव रहे हैं इसलिए भगवान विष्णु की पूजा हमेशा शंख से की जाती है परंतु भगवान शिव को कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।

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